गुड़ सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है, लेकिन बाजार में मिलने वाले गुड़ में अक्सर वजन बढ़ाने के लिए चाक पाउडर या रंग साफ करने के लिए हानिकारक केमिकल्स (जैसे सोडियम बाइकार्बोनेट) मिला दिए जाते हैं।
घर पर असली गुड़ की पहचान करने के लिए आप ये 5 आसान तरीके अपना सकते हैं:
- रंग की पहचान (सबसे आसान तरीका)
- नकली गुड़: अगर गुड़ देखने में बहुत ज्यादा पीला, सफेद या हल्का सुनहरा है और बहुत चमक रहा है, तो समझ लीजिए कि इसे रसायनों (ब्लीच) से साफ किया गया है।
- असली गुड़: शुद्ध गुड़ का रंग हमेशा गहरा भूरा (Dark Brown) या थोड़ा कालापन लिए होता है। वह दिखने में कम आकर्षक हो सकता है, लेकिन सेहत के लिए वही असली है।
- पानी का टेस्ट (Water Test)
- एक गिलास पानी में गुड़ का एक छोटा टुकड़ा डालें।
- असली गुड़: यह पानी में पूरी तरह घुल जाएगा और पानी का रंग हल्का भूरा हो जाएगा।
- नकली गुड़: अगर गिलास की तली में सफेद पाउडर या धूल जैसी कोई चीज़ बैठ जाए, तो इसका मतलब है कि उसमें ‘चाक पाउडर’ या मिलावट की गई है।
- स्वाद चखें
- गुड़ का एक टुकड़ा जीभ पर रखें।
- असली गुड़: इसका स्वाद गहरा मीठा और प्राकृतिक होगा।
- नकली गुड़: अगर स्वाद में हल्का कड़वापन, तीखापन या नमकीन एहसास हो, तो यह मिलावट या पुराने गुड़ की निशानी है। बहुत ज्यादा नमकीन गुड़ में मिनरल्स की मात्रा कम हो सकती है।
- बनावट और कठोरता (Touch & Texture)
- गुड़ को हाथ से दबाकर देखें।
- असली गुड़: शुद्ध गुड़ थोड़ा नरम और दानेदार होता है। इसमें गन्ने के रेशों की प्राकृतिक महक आती है।
- नकली गुड़: बहुत ज्यादा सख्त या पत्थर जैसा गुड़ अक्सर चीनी की चाशनी मिलाकर बनाया जाता है।
- नींबू या सिरके का टेस्ट (Acid Test)
- गुड़ के एक छोटे टुकड़े पर नींबू के रस की कुछ बूंदें या सिरका डालें।
- अगर गुड़ में बुलबुले (fizzing) उठने लगें, तो समझ लीजिए कि इसमें वॉशिंग सोडा या सोडियम बाइकार्बोनेट मिलाया गया है। शुद्ध गुड़ में कोई रिएक्शन नहीं होता।
प्रो टिप: हमेशा गहरा भूरा या थोड़ा काला दिखने वाला गुड़ ही खरीदें। चमकदार पीले गुड़ से बचें क्योंकि वह दिखने में अच्छा हो सकता है लेकिन रसायनों से भरा होता है।
मिलावटी गुड़ न केवल स्वाद में खराब होता है, बल्कि लंबे समय तक इसका सेवन शरीर के अंगों को नुकसान पहुँचा सकता है। यहाँ कुछ मुख्य नुकसान दिए गए हैं:
- पाचन संबंधी समस्याएं
सफेद या चमकदार गुड़ बनाने के लिए अक्सर सोडियम बाइकार्बोनेट (बेकिंग सोडा) और अन्य रसायनों का उपयोग होता है। इससे पेट में एसिडिटी, गैस और पाचन शक्ति कमजोर होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।- लिवर और किडनी पर असर
गुड़ को साफ करने के लिए कई बार कैल्शियम कार्बोनेट और सल्फर का इस्तेमाल किया जाता है। ये भारी तत्व हमारे लिवर और किडनी को इन्हें फिल्टर करने के लिए अतिरिक्त मेहनत करवाते हैं, जिससे लंबे समय में इन अंगों में सूजन या इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।- एलर्जी और अस्थमा
नकली गुड़ में इस्तेमाल होने वाले कृत्रिम रंग और ‘सल्फर डाइऑक्साइड’ सांस की तकलीफ पैदा कर सकते हैं। जिन लोगों को पहले से अस्थमा या एलर्जी है, उनके लिए ऐसा गुड़ काफी हानिकारक हो सकता है।- हड्डियों पर प्रभाव
वजन बढ़ाने के लिए मिलाया जाने वाला चाक पाउडर (Chalk Powder) शरीर में कैल्शियम के अवशोषण को बाधित कर सकता है और ज्यादा मात्रा में जमा होने पर शरीर के जोड़ों में दर्द का कारण बन सकता है।- ब्लड शुगर में अचानक बढ़ोतरी
शुद्ध गुड़ का ग्लाइसेमिक इंडेक्स चीनी से कम होता है, लेकिन मिलावटी गुड़ में अक्सर सफेद चीनी की चाशनी मिला दी जाती है। इससे शुगर लेवल तेजी से बढ़ सकता है, जो डायबिटीज के मरीजों के लिए खतरनाक है।
असली गुड़ स्टोर करने का सही तरीका
असली गुड़ (बिना केमिकल वाला) जल्दी खराब हो सकता है क्योंकि इसमें नमी होती है। इसे सुरक्षित रखने के लिए:
- इसे हमेशा कांच के जार या स्टील के डिब्बे में रखें।
- धूप और नमी से दूर किसी ठंडी और सूखी जगह पर रखें।
- हो सके तो गुड़ के छोटे टुकड़े करके रखें ताकि इस्तेमाल करने में आसानी हो।
आयुर्वेद में पुराने गुड़ (Old Jaggery) को दवा के समान माना गया है। आमतौर पर 1 साल या उससे अधिक पुराना गुड़ स्वास्थ्य के लिए नए गुड़ की तुलना में कहीं ज्यादा फायदेमंद होता है।
यहाँ इसके मुख्य कारण और औषधीय गुण दिए गए हैं:
1. कफ और पित्त का नाश
- नया गुड़: नया गुड़ भारी होता है और शरीर में कफ (Cough) बना सकता है। अगर आपको जुकाम है, तो नया गुड़ इसे बढ़ा सकता है।
- पुराना गुड़: जैसे-जैसे गुड़ पुराना होता है, उसकी तासीर बदल जाती है। यह कफ, वात और पित्त तीनों को संतुलित करता है। यह फेफड़ों को साफ करने और अस्थमा के मरीजों के लिए रामबाण माना जाता है।
2. पाचन के लिए बेहतर (Digestive Power)
पुराना गुड़ नए गुड़ के मुकाबले पचाने में बहुत हल्का होता है। यह पेट की अग्नि (Agni) को बढ़ाता है, जिससे भूख अच्छी लगती है और कब्ज (Constipation) की समस्या जड़ से खत्म होती है।
3. एनीमिया (खून की कमी) में असरदार
पुराने गुड़ में आयरन की सघनता अधिक हो जाती है। यह शरीर में हीमोग्लोबिन के स्तर को नए गुड़ की तुलना में तेजी से बढ़ाता है।
4. टॉक्सिन्स बाहर निकालना (Detoxification)
पुराना गुड़ एक बेहतरीन नेचुरल क्लींजर है। यह लिवर और रक्त से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में ज्यादा सक्षम होता है। इसी कारण पुराने समय में लोग खाने के बाद एक डली पुराना गुड़ जरूर खाते थे।
एक जरूरी सावधानी:
पुराना गुड़ खरीदते समय यह जरूर देखें कि उसमें फफूंद (Mold) न लगी हो या उसमें से अजीब सी बदबू न आ रही हो। अगर गुड़ में जाले पड़ गए हों, तो वह खराब हो चुका है और उसे नहीं खाना चाहिए।
