मल्टीग्रेन आटा (Multigrain Atta) वह आटा है जो दो या दो से अधिक प्रकार के अनाज, मोटे अनाज (Millets) और दालों को एक निश्चित अनुपात में मिलाकर तैयार किया जाता है।
साधारण गेहूं के आटे की तुलना में यह अधिक पौष्टिक होता है क्योंकि इसमें अलग-अलग अनाजों के गुण एक साथ मिल जाते हैं।
1. इसमें आमतौर पर क्या-क्या मिलाया जाता है?
एक अच्छे मल्टीग्रेन आटे में अक्सर ये अनाज शामिल होते हैं:
- गेहूं: मुख्य आधार के रूप में।
- चना (Sattu/Gram): प्रोटीन के लिए।
- जौ (Barley): फाइबर और ठंडक के लिए।
- बाजरा या रागी: कैल्शियम और आयरन के लिए।
- सोयाबीन: हाई प्रोटीन के लिए।
- मक्का: ऊर्जा और स्वाद के लिए।
- ज्वार: पाचन को बेहतर बनाने के लिए।
2. इसके मुख्य फायदे
- भरपूर फाइबर: इसमें साधारण आटे से ज्यादा फाइबर होता है, जो कब्ज को दूर करता है और पाचन सुधारता है।
- वेट लॉस में मददगार: फाइबर ज्यादा होने की वजह से इसे खाने के बाद पेट लंबे समय तक भरा महसूस होता है, जिससे भूख कम लगती है।
- डायबिटीज में फायदेमंद: इसका ‘ग्लाइसेमिक इंडेक्स’ कम होता है, यानी यह ब्लड शुगर को एकदम से नहीं बढ़ाता।
- प्रोटीन का अच्छा स्रोत: दालें और सोयाबीन मिलने के कारण यह मांसपेशियों की मजबूती के लिए अच्छा है।
3. घर पर मल्टीग्रेन आटा बनाने का सही अनुपात
बाजार के पैकेट बंद आटे में कभी-कभी सस्ते अनाज ज्यादा होते हैं। आप घर पर इस अनुपात (Ratio) में बना सकते हैं:
10 किलो गेहूं के लिए मिश्रण:
- 1 किलो चना
- 500 ग्राम जौ
- 500 ग्राम सोयाबीन
- 500 ग्राम रागी या बाजरा
- 500 ग्राम ज्वार
जरूरी सावधानी
मल्टीग्रेन आटा हर किसी के लिए सही नहीं होता। कुछ लोगों को इसे पचाने में भारीपन महसूस हो सकता है। अगर आपको पाचन की समस्या है, तो शुरुआत में कम मात्रा में अनाज मिलाकर देखें।
